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मार्च
1995 में स्थापित
जलागम
विकास
विभाग
ग्रामीण
क्षेत्रों
में सूक्ष्म
रूप से जल से
सुरक्षा के
विकास को
संपूर्ण
करता है।
मिट्टी तथा
पानी को
सुरक्षित
रखने तथा
पुन:उपयोग
करना,
बायोमास
संबंधी
समूहों का
उत्पादन
कराना तथा
आर्थिक
प्रणाली को
लागू करना,
रोजगार तथा
आर्थिक
अवसर
सामुदायिक
रूप से उपलब्ध
कराना,
प्रमुख
उद्देश्य
हैं।
कपार्ट
के
निर्देशन
के अंतर्गत
जलागम के
विकास योजना
को पहले स्वयंसेवी
संगठनों को
द्वितीय
श्रेणी में
रखा जाता है,
जब यह सहयोगी
स्वयंसेवी
संगठनों
में किसी एक
के अंतर्गत
सफलतापूर्वक
प्रशिक्षण
समाप्त कर
लेता है तो
कार्यकारिणी
की सक्रिय
योजना के
अंतर्गत
प्रथम
श्रेणी में
प्रस्तावित
किया जा सकता
है। इसका
प्रमुख
लक्ष्य है –
हर अवस्था
में लोगों
को क्षमता
निर्माण
में लिप्त
करना, जलागम
योजना को
कार्यान्वित
कराने तथा
अधिकृत
धनराशि से
उसके
रखरखाव को
निर्वाह
करना।
कपार्ट के
निरीक्षण
में चार
विभाग बंटे
हुए हैं –
75 प्रतिशत
जलागम-योजना
का परीक्षण
तथा विकास
कार्य के
लिए, 5
प्रतिशत
सामुदायिक
संगठन तथा
प्रशिक्षण
दोनों के
लिए, 15
प्रतिशत
प्रशासनिक
व्ययों को
पूर्ण करने
के लिए
विभाजित
किया गया
है।
सामाजिक वन्य
परियोजनाएं
भी इस
प्रभाग में
जवाहर
रोजगार
योजना के
अंतर्गत
सहायता
प्राप्त
करती हैं।
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